Sunday, 3 February 2019

मत्तगयंद सवैया


मत्तगयंद सवैया ( 23 वर्ण,  7 भगण (S। ।) के साथ 2 गुरु )
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व्याकुल दीन समाज जना पथ कंटक मौन बुना करते हैं ।
आप बड़े कुछ भी कह लें पर राह युगीन चुना करते हैं ।
कुंज करील कुरंग कराल कला अवरोध गुना करतें हैं ।
पावन पुष्प पराग पुनीत विकार हरे अधुना करते हैं ।


श्वेत घनी सदरी पहने पथ पर्वत कंत दिगंत हुए हैं ।
साधक से उजले तन पाहन लीन तपोनिधि संत हुए हैं ।
धीर अधीर पथी सिहरे ; सिहरे तरु पत्र अनंत हुए हैं ।
शीत शिकार करे जन मानस राह कटे कस हंत हुए हैं ।


*** डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी ***

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