Sunday, 6 January 2019
स्वागतम् नववर्ष का
स्वागतम् नववर्ष का।
आचमन हो हर्ष का।
स्वप्न की यह रात आई तो मगर।
ढूँढने पर मिली फिर वो ही डगर।
साल पर प्रति साल का है आवरण-
अवनि पर तारे बिछा पाता अगर।
बीज बोता कर्ष में उत्कर्ष का।
अंक-माला पूर्ण हो गत साल की।
द्युत उठी इतिहास की नव पालकी।
अक्ष-सीपी माँगती है स्वाति-कण-
बेबसी में रेख धुँधली भाल की।
है उगा यह प्रात भी संघर्ष का।
है कहाँ अभिनव दिशाओं का वलय।
उदधि-जीवन, बूँद-मानस का विलय।
नित्य उतरे है गगन से रश्मि-दल-
शुचि सजाता धरा का अनुपम निलय।
अब नया विमर्श क्या है प्रकर्ष का।
*** सुधा अहलूवालिया ***
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