Sunday, 25 December 2016

जीवन-दर्शन



हार-जीत जीवन का संगम, इन से क्या घबराना रे,
सुख-दुःख जीवन के दो पहलू, हँसकर सब सह जाना रे,
जनम-मरण, उत्थान-पतन, सब,प्रभु के हाथ खिलौना रे,
जोर न कोई इन पर चलता, फिर क्यों रोना-धोना रे।


***** विश्वजीत शर्मा 'सागर'

No comments:

Post a Comment

नश्वर काया श्वास भरे जो, मिली हमें है तोल - एक गीत

  नश्वर काया श्वास भरे जो, मिली हमें है तोल। करुण हृदय हो सहज वेदना, थाती ये अनमोल। ओढ़ आवरण जन्म-मृत्यु का, राजा हो या भृत्य। उजले तन का मा...