साहित्य में सहजता ही उसकी उन्नति की आधारशिला है।
गीत गुनेंगे सरगम अपने, नित्य नये अहसास जगाकर। राष्ट्र चेतना रोम-रोम में, 'मान' सहित विश्वास जगाकर। सरस लालिमा प्राचीरों पर, आभा-मण्...
No comments:
Post a Comment