Sunday, 2 March 2025

विनती सुनो हमारी - एक भक्ति गीत

 

हे शिव शंकर औघड़दानी, विनती सुनो हमारी।

उग्र महेश्वर हे परमेश्वर, शिव शितिकंठ अनंता।
हे सुरसूदन हरि कामारी, महिमा वेद भनंता।।
रुद्र दिगंबर हे त्रिपुरांतक, प्रभु कैलाश बिहारी।
हे शिव शंकर औघड़दानी, विनती सुनो हमारी।।

अष्टमूर्ति कवची शशि शेखर, देव सोमप्रिय नाथा।
गंगाधर अनंत खटवांगी, चरण धरूँ निज माथा।।
अनघ भर्ग सर्वज्ञ अनीश्वर, विश्वेश्वर रहा निहारी।
हे शिव शंकर औघड़दानी, विनती सुनो हमारी।।

सोम त्रिलोकेश्वर सुरसूदन, पाश विमोचन देवा।
भीम अंबिकानाथ कृपानिधि, नित्य करूँ मैं सेवा।।
शोक हरो प्रभु सकल विश्व के, सारा जगत दुखारी।
हे शिव शंकर औघड़ दानी, विनती सुनो हमारी।।

चंद्र पाल सिंह 'चंद्र'

No comments:

Post a Comment

एक बेहतरीन ग़ज़ल - हो फ़लसफ़ा ऐसा

  दुविधा रही मन में गहन अभ्यास के उपरांत भी तरकश में तो इस जिंदगी के सज गए सिद्धांत भी दर्शन यही लेकर सृजन भी कर रहा है पुण्य का श्रम क...