Sunday, 4 September 2022

क्षमा पर्व

 


वाणी से कर दे क्षमा, वही नेक इंसान ।
नत-मस्तक होता वही, बनता सदा महान ।।
बनता सदा महान, वृक्ष ऊपर उठ झुकता ।
करता रहे घमण्ड, किसी की वह कब सुनता ।।
हुआ किसी को कष्ट, भले कोई हो प्राणी ।
क्षमा करेंगे आप, सभी सुन मेरी वाणी ।।

भूषण मानव का क्षमा, वीरों की पहचान ।
कायर करता घात है, वीर क्षमा का दान ।।
वीर क्षमा का दान, करे उसकी सज्जनता ।
दीन-हीन को लूट, दिखाते कुछ दुर्जनता ।।
मिले भूल से कष्ट, नहीं दो उसको दूषण ।
सन्तों का सन्देश, क्षमा मानव का भूषण ।।

भूले भटके ही सही, दिया अगर हो घात ।
क्षमा मुझे करना जरा, भूल पुरानी बात ।।
भूल पुरानी बात, मधुर सम्बन्ध बनाएं ।
कटुता के ये भाव, दिलों से आज हटाएं ।।
करने मेल-मिलाप, प्रेम का झूला झूले ।
क्षमा पर्व पर आज, चलो अब कटुता भूले ।।
 
 *** लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला

1 comment:

  1. हार्दिक आभार आद. Vishwajeet Sapan जी ।

    ReplyDelete

एक बेहतरीन ग़ज़ल - हो फ़लसफ़ा ऐसा

  दुविधा रही मन में गहन अभ्यास के उपरांत भी तरकश में तो इस जिंदगी के सज गए सिद्धांत भी दर्शन यही लेकर सृजन भी कर रहा है पुण्य का श्रम क...