सुन्दर हो संसार हमारा घर में सुख-दुख की लहरें हों।चाहत के सपनों में पूरित अनुपम कुछ क्षण भी ठहरे हों॥धैर्य सजेगा जीवन में तो मंजुल-मन अनुराग बुनेगा।मिल बाटेंगे प्यार परस्पर इन्द्रधनुष-मन फाग चुनेगा।बहती जाती जीवन-नदिया अंतस-घट रसमय गहरे हों।चाहत के सपनों में पूरित अनुपम कुछ क्षण भी ठहरे हों॥थोड़ी आशा छोटे सपने पंख लगा कर उड़ निकलें हम।पूरी हों चाहें प्रयास हो पा कर खो कर मुड़ निकलें हम।कर्म-धर्म की सुन्दर राहें चाल-चलन पर दृड़ पहरे हों।चाहत के सपनों में पूरित अनुपम कुछ क्षण भी ठहरे हों॥मान बड़े-छोटों को सबको मिले बराबर यही रीति है।नारी को बस नेह चाहिये प्रेम समर्पण सुभग नीति है।पुरुष गर्व होते हैं घर के शिशु-किलके फुलवा-छहरे हों।चाहत के सपनों में पूरित अनुपम कुछ क्षण भी ठहरे हों॥*** सुधा अहलूवालिया ***
Sunday, 14 March 2021
सुन्दर हो संसार
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
नश्वर काया श्वास भरे जो, मिली हमें है तोल - एक गीत
नश्वर काया श्वास भरे जो, मिली हमें है तोल। करुण हृदय हो सहज वेदना, थाती ये अनमोल। ओढ़ आवरण जन्म-मृत्यु का, राजा हो या भृत्य। उजले तन का मा...
-
पिघला सूर्य , गरम सुनहरी; धूप की नदी। बरसी धूप, नदी पोखर कूप; भाप स्वरूप। जंगल काटे, चिमनियाँ उगायीं; छलनी धरा। दही ...
-
जब उजड़ा फूलों का मेला। ओ पलाश! तू खिला अकेला।। शीतल मंद समीर चली तो , जल-थल क्या नभ भी बौराये , शाख़ों के श्रृंगों पर चंचल , कुसुम-...
No comments:
Post a Comment