Sunday, 2 February 2020

रखते तनिक सबूरी

 

हम हीरा-मोती थे तेरे, सुन ओ मालिक झूरी।
आत्मघात ना करते मालिक, रखते तनिक सबूरी।।


फसल गई बह, कर्ज़ चढ़ा सिर
माना थी चिंतायें,
यूँ मरने से दूर हो गईं
क्या मालिक! विपदायें?  


कर्ज पटाते ख़ूब कमा कर, जान लगाते पूरी,
आत्मघात ना करते मालिक, रखते तनिक सबूरी।1।


हमसे तुम क्या बिछड़े मालिक
साँस गई है रुक सी,
मन की हिम्मत टूट गई अब
कमर गई है झुक सी, 


तुम बिन जीना नामुमकिन है, पर जीवन मजबूरी।
आत्मघात ना करते मालिक, रखते तनिक सबूरी।2। 


महँगे-सस्ते हमें बेचते
कुछ ऋण तो पट जाता,
देख तुम्हें थोड़ा ख़ुश मालिक
चैन हमें कुछ आता,


ख़ुशबू नाथ तुम्हारी अब क्यों, हुई आज कस्तूरी।
आत्मघात ना करते मालिक, रखते तनिक सबूरी।3।


*** अवधूत कुमार राठौर ***

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