Sunday, 23 December 2018
निशानी
अपने' क़िरदार से' तू मील का' पत्थर बन जा
रह-रवों के लिए' रहबर सा' इक अख़्तर बन जा
ज़िन्दगी तेरी ज़माने को' हो' इक पैमाना
बशरियत के लिए' अनमोल सा' ज़ेवर बन जा
जाना' ही है तो' यहाँ छोड़ निशानी ऐसी
सब जवानों में' हो' इक तेरी' जवानी ऐसी
हो के' क़ुर्बान वतन पर तु सितारा हो जा
कहकशाओं को' मिले एक रवानी ऐसी
*** यशपाल सिंह कपूर ***
शब्दार्थ :-
क़िरदार = चरित्र
रह-रवों = साथी मुसाफिर
रहबर = मार्गदर्शक
अख़्तर = सितारा, ध्वज
पैमाना = मानदण्ड, मानक
बशरियत = इंसानियत, मानवता
क़ुर्बान = बलिदान
कहकशाओं = आकाशगंगाओं
रवानी = चाल
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