Sunday, 19 August 2018

स्वतन्त्रता दिवस


नमन करे शत-शत उनको दिल
जिनके कारण अपना भारत
------
तम को हमसे दूर भगाकर
एक नई वे अलख जगाकर
सोचो तो किसकी खातिर वे
झूले फाँसी पर मुस्काकर

नमन करे शत-शत उनको दिल
जिनके कारण अपना भारत
-----
सूरज से वे आँख मिलाकर
आज़ादी हमको दिलवाकर
सौंपा हमको वतन हमारा
चले गए इक दीप जलाकर

नमन करे शत-शत उनको दिल
जिनके कारण अपना भारत
-----
सीने पर गोली को खाकर
लड़ते थे वे ज़ख़्म छुपाकर
मिली शहादत उनको तब ही
हमने देखा नया दिवाकर

नमन करे शत-शत उनको दिल
जिनके कारण अपना भारत
-----------------------------------------
 

*** गुरचरण मेहता "रजत"

No comments:

Post a Comment

उमड़-घुमड़ घन - कुण्डलिया

  उमड़-घुमड़ घन छा गए, नभ में चारों ओर। छम-छम छम-छम नाचते, पंख पसारे मोर। । पंख पसारे मोर, छटा अद्भुत मनहारी। करें नगाड़े शोर, मचा कोलाहल भा...