Sunday, 4 March 2018

फागुन का रंग



फाग का रंग भाएगा तब ,
मधु मिलन की रात आएगी, हमारा चाँद हम पर,
चाँदनी बरसाएगा जब।


प्रीति का गुलाल प्रियतम चूनरी पर डाल देगा,
हरितिमा ला प्रकृति की जब जीवनी में साल देगा,
इन्द्र-धनुषी विविध रंगो की रंगोली गौर मुख पर,
भाव अंतस के मेरे स्व भाव में ले ताल देगा।


स्नेह का स्पर्ष मधुरिम फागुनी रस भाल पर दे,
प्रीति का अस्वाद घुल-मिल एक रस हो जाएगे जब,
फाग अंतस गाएगा तब।


रंगों का मिश्रण अनूठा श्याम रंग हो जाएगा मिल,
मौन मानस रंग-रस भर प्रीति में खो जाएगा खिल,
जब सिन्दूरी क्षितिज से आकर अरुण निज गात में ले,
श्वेत अंबर शीश पर दे रंग-रस घुल जाएगा हिल।


रैन में बन्दी हुए सौरभ उड़ेगे मन सुहासित,
बावली में कोकनद पर मधुप गुंजित गाएगा जब,
फाग मन हो जाएगा तब।


 ***** सुधा अहलूवालिया

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