Sunday, 13 November 2016

प्रहार कर


हरेक बात गौर कर सुनीति से विचार कर।
प्रथम स्वयं की दुष्ट प्रवृति पर प्रहार कर।

असीम दुख, प्रताड़ना, अशेष यातना भुगत
भिड़ा रहा है रात दिन, दो जून चून की जुगत
लिए हुए तृषित अधर, जुगाड़ में जो नीर की
फटे वसन बता रहे, व्यथा अनंत पीर की
नहीं दिखा सहार दे, कोई व्यथा से तार दे
नहीं किसी गरीब को अनीति का शिकार कर
।

प्रथम स्वयं की...

विलासिता प्रधान आज जिंदगी बदल रही
दहेज सम अभी प्रथा समाज में है चल रही
नये चलन नये असर नये विधान कर सृजित
विक्षिप्त हो रहे युवा नशे की आग में ग्रसित
विनाश ले अनेक रूप डस रहा है नाग सा
मनुज के विकास हित कुरीति में सुधार कर
।

प्रथम स्वयं की...

*** गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत'
बीकानेर (राजस्थान )

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