साहित्य में सहजता ही उसकी उन्नति की आधारशिला है।
वाह ! कायल हूँ आपकी लेखनी का … यथार्थ का सजीवता के साथ चित्रण किया है ।- पवन प्रताप सिंह 'पवन'
सादर आभार एवं नमन पवन सिंह राजपूत जी.
नश्वर काया श्वास भरे जो, मिली हमें है तोल। करुण हृदय हो सहज वेदना, थाती ये अनमोल। ओढ़ आवरण जन्म-मृत्यु का, राजा हो या भृत्य। उजले तन का मा...
वाह ! कायल हूँ आपकी लेखनी का … यथार्थ का सजीवता के साथ चित्रण किया है ।
ReplyDelete- पवन प्रताप सिंह 'पवन'
सादर आभार एवं नमन पवन सिंह राजपूत जी.
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