Subscribe to:
Post Comments (Atom)
कहानी अग्नि की
'अग्नि' उन्नति की कथा है, 'अग्नि' अवनति की कहानी। यदि सृजन का मंत्र है यह, तो प्रलय की भी निशानी। यज्ञ में हो प्रज्ज्वलित ...
-
पिघला सूर्य , गरम सुनहरी; धूप की नदी। बरसी धूप, नदी पोखर कूप; भाप स्वरूप। जंगल काटे, चिमनियाँ उगायीं; छलनी धरा। दही ...
-
जब उजड़ा फूलों का मेला। ओ पलाश! तू खिला अकेला।। शीतल मंद समीर चली तो , जल-थल क्या नभ भी बौराये , शाख़ों के श्रृंगों पर चंचल , कुसुम-...
waah bahut khubsurat ehsaason se saji ghazal...
ReplyDeleteआपका बहुत बहुत शुक्रिया सिया कुमार जी। आपके प्रेरक शब्दों ने मेरा हौसला बढ़ाया है.
Delete