Sunday, 1 November 2026

विवश पड़ी फाँसी की रस्सी - एक गीत

 


विवश पड़ी फाँसी की रस्सी, चुप-चुप आँसू पीती है।
लील गई सुत भारत माँ के, शापित जीवन जीती है।

 

व्यथा सुनाए खोल हृदय को, आँखों से आंँसू बहते।
लाल अनेकों हँस कर झूले, भारत की जय-जय कहते।
बोली उस दिन प्रति पल प्रति क्षण, मौत उसी पर बीती है।
लील गई सुत भारत माँ….

 

कौन घड़ी में भाग्य विधाता, तुमने मेरा भाग्य गढ़ा।
रेशम से सौ रिश्ते जोड़े, सिर पर मेरे त्याज्य मढ़ा।
जीर्ण-शीर्ण भावों की चादर, आखर-आखर सीती है।
लील गई सुत भारत माँ ….

 

कुछ कलंक धोया कर्मों का, जब आतंकी को पकड़ा।
तृण-तृण में संचित शक्ति से, खल की ग्रीवा को जकड़ा।
श्रद्धा अर्पण उस माता को, जिसकी गागर रीती है।
लील गई सुत भारत माँ….

*** अर्चना सिंह 'अना' 

1 comment:

  1. अत्यंत उत्कृष्ट हृदयस्पर्शी एवं भावपूर्ण सृजन अर्चना 👌👏👏👏

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