Sunday, 6 December 2015

एक क़’तअ



यही इच्छा हमारी है, चलो कुछ काम कर जायें,
वतन पर जान देकर हम, फ़क़त गुमनाम मर जायें,
हमें सब कुछ दिया इसने, इसे हमने दिया क्या है?
बुराई को मिटा दें अब, ख़ुशी सब नाम कर जायें।


*** विजय मिश्र ‘दानिश’ ***

No comments:

Post a Comment

नश्वर काया श्वास भरे जो, मिली हमें है तोल - एक गीत

  नश्वर काया श्वास भरे जो, मिली हमें है तोल। करुण हृदय हो सहज वेदना, थाती ये अनमोल। ओढ़ आवरण जन्म-मृत्यु का, राजा हो या भृत्य। उजले तन का मा...