संसद में संवाद शुरू है, नारी है जिसका उन्वान।
प्राची प्रकट हुई भारत में, लेकर आज नया दिनमान॥
प्राची प्रकट हुई भारत में, लेकर आज नया दिनमान॥
उषा लिए उम्मीद रश्मियाँ, पहुँच रही संसद के द्वार।
शोर मचा चहुँ ओर बढ़ रहा, भारत में नारी अधिकार।
किन्तु अभ्र आशंकाओं के, खड़ा अभी आभा को घेर।
साथ ग्रहण बन रूढ़ शक्तियाँ, करा रहे शुभक्षण में देर।
छ्द्म कोहरा फट जाएगा, आएगा ही नवल विहान।
प्राची प्रकट हुई भारत में, लेकर आज नया दिनमान॥
जल थल नभ के आयामों तक, नारी पहुँच रही है आज
रहा न कोई क्षेत्र बचा अब, जहाँ न भरती ये परवाज़।
अगर न्याय है तो आधा दो, ऐसा ही कहता दस्तूर।
दशम अंश दे उन्हें रखा है, संसद के चौखट से दूर।
भीख नहीं हक माँग रही है, लौटा दो उसका सम्मान।
प्राची प्रकट हुई भारत में, लेकर आज नया दिनमान॥
सिर्फ लुभावन वादे हैं या, सचमुच पुरुष हुआ गंभीर।
या नारी को चाप बना कर, मारा पुनः चुनावी तीर।
पहला बिल लेकर जब आया, लोक सभा चुनाव चौबीस।
कहा गया धर्य रख नारी, दूर नहीं है अब है उनतीस।
बंग जीतने की चाहत है, या होगा नारी उत्थान।
प्राची प्रकट हुई भारत में, लेकर आज नया दिनमान॥
*** शशि रंजन 'समदर्शी'

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