Sunday, 22 December 2019

गीत - सरसी छंदाधारित


खेल रचे संसार
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खेल-खेल में मित्र बनें हम, हुआ अचानक प्यार।
जोड़ी बन ऊपर से आती, खेल रचे करतार।।


कह दी उसने खेल-खेल में, एक राज की बात।
हुआ प्यार है मुझको तुमसे, सुन मेरे जज्बात।।
मेरी तुमसे विनती इतनी, सुनो लगाकर कान।
दे सकते हो क्या मुझको तुम, अपनी ये पहचान।।
ठण्डे दिल से करो जरा अब, इस पर गहन विचार।

जीवन तो है एक खिलौना, गठबंधन में सार।
जोड़ी बन ऊपर से आती, खेल रचे करतार।।


प्यार मुहब्बत की ये बातें, सुनकर हुआ अवाक।
माँ-बापू कहते हैं रिश्तें, बने साक्ष्य में पाक।।
रहा सोचता क्या उत्तर दूँ, जगकर सारी रात।
नही दुखा दिल, दे सकता मैं, उसको यूँ आघात।
मात-पिता यदि हामी भरदें, जुड़ें शीघ्र फिर तार।।

खिलती कलियाँ इस जीवन में, करें हृदय संचार।
जोड़ी बन ऊपर से आती, खेल रचे करतार।।


रक्तिम गाल गुलाल देखकर, तुम पर ह्रदय निछार।
प्रणय निवेदन की हामी भर, हृदय हुआ गुलजार।।
माँ-बापू अब कुंकुम-केशर, करें जरा स्वीकार।
मधुर-मधुर ये रूप तुम्हारा, प्रेम-प्रीति आधार।।

आकर घर में दीप जलाकर, करना घर उजियार।
जोड़ी बन ऊपर से आती, खेल रचे करतार।।


*** लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला ***

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